Sat. Oct 31st, 2020

शर्म के कारण कहा ना जाए घर में राशन कहां से आए मध्यम वर्ग के ग्रामीणों की दास्तां

शर्म के कारण कहा ना जाए घर में राशन कहां से आए।

 

 

पूरनपुर के कई गांव में ग्राम में कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जो मध्यम वर्ग से नीचे जीवन यापन करते हैं ना उन्हें हम गरीब कह सकते हैं और ना ही अधिक धनवान जो 5 से 6000 8000 की नौकरी प्राप्त करते हैं उन वर्गों को अब अपना परिवार पालना मुश्किल पड़ रहा है क्योंकि ना तो वह किसी के आगे यह कह सकते हैं कि मैं भूखा हूं और ना ही अपनी समस्याओं को रख सकते हैं इन विचारों की समस्याओं को सुनने वाला कौन।

सबसे ज्यादा परेशान वे इंसान हैं, जो  5000-6000  की नौकरी में पूरी फैमिली को संभालते है और बाहर इज्जत बनाकर रहते है । लोग समझते हैं यह मजे मे हैं। पर वो बंदा बस जैसे-तैसे रोटी,चावल खाकर घर का खर्चा चला ही रहा होता है । सेविंग कुछ होती नही है क्योंकि 10-12 में चार फैमिली मेम्बर्स की महीने भर की जरूरत पूरी करनी होती है । 27दिन हो गये है , लॉक डाउन को जो राशन वगैरह होता है, वो पहले ही हफ्ते मे खत्म हो चुका हैं । अब बंदा शर्म की वजह से किसी से मांग भी नही सकता और लोग खुद देते भी नही, यह सोचकर कि इसका रहन सहन अच्छा है तो इसे मदद की क्या जरूरत होगी। पर हकीकत मे सबसे ज्यादा जरूरतमंद ऐसे लोग ही होते है । ज्यादा गरीब लोगो के पास तमाम संस्थाये और आस पड़ोस के लोग पहुँच जाते है , राशन दान देने। लेकिन बीच का यह आदमी/ परिवार भूखा रहने पर मजबूर रहता है, वो आखिर करे तो क्या करे।
इसलिए जो लोग गरीब जनता की मदद कर रहे है वे ऐसे परिवारो पर भी नजर रखे और उनकी मदद करे।
🙏🙏🙏🙏🙏

ये सब मैंने इसलिए लिखा क्यूंकि में भी इसी बर्ग से जुड़ा हूं

प्लीज़ कोई आगे आए मीडियम बरग की मदद के लिए

अगर मेरी बात से सहमत हैं तो कृपया मेरी आवाज सरकार तक पहुंचाए बहुत ज्यादा शेयर करे कॉमेंट करे
(मित्रो! आगे बढ़ाइये, मध्यमवर्गीय परिवारों की सुधि भी लीजिए)

   बिचारार्थ -अमित बाजपाई व समस्त मध्यम वर्ग  ग्रामीण

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