Sun. Jan 24th, 2021

जिलाधिकारी द्वारा बताए गए पराली को कैप्सूल द्वारा नस्ट करने ,कम्पोस्ट खाद बनाने के तरीके

पीलीभीत।

 

जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में माधौटांडा रोड़ पर स्थित जमुनिया ग्राम खासपुर में पराली के उचित प्रबंधन हेतु निर्मित कैप्सूल एवं वेस्ट डी कम्पोजर के सम्बन्ध में किसानों डेमो टेस्ट की जानकारी प्रदान करने हेतु गोष्टी का आयोजन किया गया।

आयोजित कार्यक्रम में जिलाधिकारी द्वारा किसान भाइयों से अपील करते हुए कहा किसान बन्धु पराली खेत में किसी भी दशा में न जलाएं, क्योंकि फसल अवशेष जलाने से भूमि में उपस्थित जैविक कीट व उर्वरक तत्व नष्ट होने के साथ हमारे पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचता है तथा कीट मित्र व उर्वरक तत्व नष्ट होने से अगली फसल की उत्पादकता कम हो जाती है।

 


उन्होंने किसान भाईयों को सम्बोधित करते हुये कहा कि फसल अवशेष के उचित प्रबन्ध के अनेकों उपाय है किसान बन्धु उनका उपयोग अवश्य करें। उन्होंने कहा कि पराली के प्रबन्धन हेतु कृषि वैज्ञानिकों द्वारा पराली को जैविक खाद के रूप में परिवर्तित करने हेतु रू0 20 के मूल्य में कैप्सूल विकसित कर उपलब्ध कराया गया है। जिसका डेमो परीक्षण आप सभी को अभी दिखाया जायेगा जिससे उसका उपयोग कर 1 एकड़ की पराली को 15 दिन में जैविक खाद के रूप में गला कर उपयोग की जा सकती है। इसके साथ ही साथ किसान बन्धु वेस्ट डी कंपोजर नामक दवाई के उपयोग के माध्यम से भी पराली का उचित प्रबन्धन किया जा सकता है । रू0 20 मूल्य के वेस्ट डी कम्पोजर के माध्यम से 10 मी0टन पराली को खाद के रूप में परिवर्तित की जा सकती है। इस सम्बन्ध में किसानों को जैविक कम्पोस्ट खाद तैयार की विधि के सम्बन्ध में भी प्रयोगात्मक जानकारी गोष्ठी के उपरान्त प्रदान की की गई।

 

जिलाधिकारी द्वारा किसान बन्धुओं से अनुरोध करते हुये कहा कि आप सभी इन उपायो का उपयोग करते हुए अपने पर्यावरण को प्रदूषण से बचाएं और साथ ही भूमि की उर्वरता को भी बढ़ाएं। आयोजित गोष्ठी में जिला कृषि अधिकारी द्वारा फसल अवशेष को जलाने से होने वाले नुकसानों के सम्बन्ध में किसान बन्धुओं को अवगत कराते हुये कहा कि पराली जलाने से मिट्टी में उपलब्ध उर्वरक पदार्थ नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश आदि नष्ट हो जाते है और साथ ही साथ उपयोगी कीट मित्र भी नष्ट हो जाते है जिससे मिट्टी की उर्वरकता शक्ति कम हो जाती है।
आयोजित गोष्ठी के उपरान्त जिलाधिकारी द्वारा खेतों में पहुंच कर किसान बन्धुओं को वेस्ट डी कम्पोजर के माध्यम कम्पोस्ट खाद तैयार करने के सम्बन्ध में जानकारी प्रदान करने हेतु डेमो परीक्षण करवाकर कार्य विधि के सम्बन्ध में विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। परीक्षण के दौरान जिला कृषि अधिकारी द्वारा जैविक कम्पोस्ट खाद तैयार करने के सम्बन्ध में अवगत कराया गया कि फसल अवशेष को गढढे में डालकर पानी छिडकाव के उपरान्त वेस्ट डी कम्पोजर का छिडकाव तीन स्तर में करने के उपरान्त ढक दिया जाये। उसके उपरान्त लगभग 15 दिन बाद फसल अवशेष जैविक खाद के रूप में परिवर्तित हो जायेगा जिसका उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जा सकेगा। जानकारी प्रदान करने के दौरान स्वयं जिलाधिकारी द्वारा गढढे में

उतरकर फसल अवशेष को दबाने की प्रक्रिया व उस पर पानी छिडकाव करने के उपरान्त वेस्ट डी कम्पोजर के छिडकाव कर जानकारी प्रदान की गई। इस दौरान जिलाधिकारी द्वारा खण्ड विकास अधिकारी एवं जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया गया कि सभी ग्राम पंचायतों के ग्राम प्रधानों को वेस्ट डी कम्पोजर का 10 ली0 का घोल उपलब्ध करा दिया जाये और गांव के कृषक बन्धु मनरेगा के माध्यम से फसल अवशेष को जैविक खाद के रूप में परिवर्तित कर सकते है। इसके साथ ही साथ उप निदेशक कृषि को निर्देशित किया गया कि समस्त ग्राम पंचायतों में इसका व्यापक प्रचार प्रसार कराया जाये। जिससे कृषक बन्धु इसका पूर्ण लाभ उठा सकें।
गोष्ठी में मुख्य विकास अधिकारी रमेश चन्द्र पाण्डेय, अपर जिलाधिकारी वि0/रा0 अतुल सिह, उप जिलाधिकारी पूरनपुर, परियोजना निदेशक अनिल कुमार, जिला विकास अधिकारी योगेन्द्र पाठक, डीसी मनरेगा मृणाल सिंह आदि मौजूद रही।

 

संजीब कुमार

स्पेशल संबाददाता पीलीभीत

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