बाढ़ पीड़ितों का जिलाधीकारी ने किया निरीक्षण

संजय शुक्ला पीलीभीत मो0 9058551162

 

 

 

एंकर- पीलीभीत में बाढ़ का पानी कम होते ही षारदा नदी ने तेजी से भू-कटान करना षुरू कर दिया है। षारदा ने तबाही मचाते हुये अब तक सौ एकड़ कृशि भूमि को निगल लिया है। वही नदी भू-कटान करते हुये षारदा तट के पास बसे गांव राहुल नगर तक पहुंच जाने से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। भू-कटान को देखते हुये ग्रामीण गांव से दूसरे सुरक्षित स्थानों पर जा रहे है। भू-कटान की सूचना पर आनन-फानन में जिला प्रशासनिक अमले ने मौका मुआयना कर रात्रि कैंप कर भू-कटान को रोकने के लिये बचाव कार्य कराना षुरू कर दिये है।

वीओ-1- बाढ़ का पानी कम होते ही षारदा नदी ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया है। षारदा नदी ने सप्ताह भर पहले तेजी से भूकटान षुरू कर दिया था। कटान करती हुई नदी गांव राहुल नगर की ओर बढ़ रही थी। नदी के कुछ दूरी पर गांव में स्थित कौषल्या देवी का घर नदी में समा गया था। वही षारदा अब तक फसल लगी सौ एकड़ कृशि भूमि लील चुकी है। कटान करती हुई राहुलनगर की ओर तेजी से बढ़ रही नदी गांव के करीब 30 मीटर की दूरी पर रह गई है।

 

वीओ-2- शारदा नदी के कटान करते हुये गांव के समीप पहुुंचने से ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। गांव के बाहर की ओर बने तीन घरों के नदी में षीघ्र समाने की आषंका देखते हुये लोगों ने घर खाली कर दिये है। वही तेजी से हो रहे भूकटान को देखते हुये गांव के लोग घरो से सामान निकालकर अपने परिवार के साथ कही दूसरे सुरिक्षत स्थानों पर जा रहे है।

वीओ-3- षारदा के तेजी से भूकटान की सूचना से जिला प्रषासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जिला प्रषासनिक अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और रात्रि कैंप कर जनरेटर आदि की लाइट में बचाव कार्यो में तेजी लाकर भूकटान को रोकने का प्रयास किया जो अब भी जारी है। वही उच्चाधिकारियों का कहना है भूकटान रोकने के लिये युद्ध स्तर पर बचाव कार्य किये जा रहे है।

 

बाइट – वैभव श्रीवास्तव, डीएम पीलीभीत

वीओ-4- हर वर्श षारदा नदी में आई बाढ़ से बड़ी तबाही होती है। बाढ़ कटान के बचान कार्यो के लिये प्रतिवर्श करोड़ों रूप्या आवंटित किया जाता है। लेकिन इस बजट से बाढ़ कटान के कार्य तो मात्र दिखावे के लिये ही किये जाते है बल्कि अधिकारी की झोलियां ज्यादा भरी जाती है। यदि समय रहते बाढ़ कटान के आवंटित बजट सही से बाढ़ भूकटान के कार्य किये जाये तो संभवता षारदा नदी से इतनी तबाही न हो…..?

संजय शुक्ला पीलीभीत मो0 9058551162

स्लग- बाढ़ से तबाही

एंकर- पीलीभीत में बाढ़ का पानी कम होते ही षारदा नदी ने तेजी से भू-कटान करना षुरू कर दिया है। षारदा ने तबाही मचाते हुये अब तक सौ एकड़ कृशि भूमि को निगल लिया है। वही नदी भू-कटान करते हुये षारदा तट के पास बसे गांव राहुल नगर तक पहुंच जाने से क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है। भू-कटान को देखते हुये ग्रामीण गांव से दूसरे सुरक्षित स्थानों पर जा रहे है। भू-कटान की सूचना पर आनन-फानन में जिला प्रशासनिक अमले ने मौका मुआयना कर रात्रि कैंप कर भू-कटान को रोकने के लिये बचाव कार्य कराना षुरू कर दिये है।

वीओ-1- बाढ़ का पानी कम होते ही षारदा नदी ने अपना विकराल रूप धारण कर लिया है। षारदा नदी ने सप्ताह भर पहले तेजी से भूकटान षुरू कर दिया था। कटान करती हुई नदी गांव राहुल नगर की ओर बढ़ रही थी। नदी के कुछ दूरी पर गांव में स्थित कौषल्या देवी का घर नदी में समा गया था। वही षारदा अब तक फसल लगी सौ एकड़ कृशि भूमि लील चुकी है। कटान करती हुई राहुलनगर की ओर तेजी से बढ़ रही नदी गांव के करीब 30 मीटर की दूरी पर रह गई है।

वीओ-2- शारदा नदी के कटान करते हुये गांव के समीप पहुुंचने से ग्रामीणों में हड़कंप मचा हुआ है। गांव के बाहर की ओर बने तीन घरों के नदी में षीघ्र समाने की आषंका देखते हुये लोगों ने घर खाली कर दिये है। वही तेजी से हो रहे भूकटान को देखते हुये गांव के लोग घरो से सामान निकालकर अपने परिवार के साथ कही दूसरे सुरिक्षत स्थानों पर जा रहे है।

वीओ-3- षारदा के तेजी से भूकटान की सूचना से जिला प्रषासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में जिला प्रषासनिक अधिकारियों ने मौका मुआयना किया और रात्रि कैंप कर जनरेटर आदि की लाइट में बचाव कार्यो में तेजी लाकर भूकटान को रोकने का प्रयास किया जो अब भी जारी है। वही उच्चाधिकारियों का कहना है भूकटान रोकने के लिये युद्ध स्तर पर बचाव कार्य किये जा रहे है।

बाइट – वैभव श्रीवास्तव, डीएम पीलीभीत

बाइट- ग्रामीण

वीओ-4- हर वर्श षारदा नदी में आई बाढ़ से बड़ी तबाही होती है। बाढ़ कटान के बचान कार्यो के लिये प्रतिवर्श करोड़ों रूप्या आवंटित किया जाता है। लेकिन इस बजट से बाढ़ कटान के कार्य तो मात्र दिखावे के लिये ही किये जाते है बल्कि अधिकारी की झोलियां ज्यादा भरी जाती है। यदि समय रहते बाढ़ कटान के आवंटित बजट सही से बाढ़ भूकटान के कार्य किये जाये तो संभवता षारदा नदी से इतनी तबाही न हो…..?

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