17 से 22 जून तक होंगे , सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम

आज से शुरू होकर 22 जून तक होंगे सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम, आदेश जारी हुआ लेकिन “नो हेलमेट नो पेट्रोल” का जिक्र तक नहीं, असमंजस बरकरार

 


पीलीभीत। शासन से जारी आदेश के बाद जनपद में 17 जून से 22 जून के बीच सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया जाएगा। इस दौरान प्रतिदिन कार्यक्रमों का आयोजन करने का आदेश जारी किया गया है

 

परंतु खास बात यह है कि 2 पेज के इस आदेश में कहीं भी “नो हेलमेट नो पेट्रोल” का जिक्र तक नहीं किया गया है। आदेश जारी न होने से पेट्रोल पंपों पर बिना हेलमेट वालों को पेट्रोल देने पर असमंजस बना हुआ है और कई जगह ग्राहक वाद विवाद व झगड़ा करने पर उतारू हैं। एआरटीओ अमिताभ राय द्वारा आज जो आदेश जारी किया गया है उसमें 17 जून को पेट्रोल पंपों पर हेलमेट न लगाने वालों की चेकिंग और कार्रवाई का अभियान चलाने की बात कही गई है। 18 जून को डिग्री कॉलेज चौराहे पर हेलमेट, सीट बेल्ट आदि की चेकिंग करके कार्यवाही की जाएगी। 19 जून को गांधी प्रेक्षागृह में विधायक संजय गंगवार की अध्यक्षता में जागरूकता गोष्ठी होगी। 20 जून को बीसलपुर में हेलमेट आदि की पेट्रोल पंपों पर चेकिंग की जाएगी। 21 जून को पूरनपुर तहसील में हेलमेट आदि की चेकिंग पेट्रोल पंपों पर की जाएगी। 22 जून को समापन पर तीनों पहर कार्यक्रम होंगे। सुबह बाइक रैली निकाली जाएगी और दोपहर 12 बजे परिवहन निगम की बसों की चेकिंग कर के ड्राइवर आदि को मेडिकल सुविधाएं

यह रहा एआरटीओ द्वारा जारी आदेश
उपलब्ध कराई जाएंगी। शाम को 7:30 बजे छतरी चौराहे पर सड़क हादसों में मरने वालों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि स्वरूप कैंडल जलाई जाएगी। इस जागरूकता कार्यक्रम के आदेश में नो हेलमेट नो पेट्रोल का कहीं जिक्र भी नहीं किया गया है। कलीनगर और अमरिया तहसीलों में कोई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित न करना भी चर्चा में है। पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल पंप डीलर्स ने नो हेलमेट नो पेट्रोल की फ्लेक्स तो लगाई है लेकिन कुछ ग्राहक ऐसे भी हैं जो लिखित आदेश मांग रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा अभी इस मामले में कोई आदेश लिखित रूप से जारी न करने से असमंजस की स्थिति बनी हुई है और पेट्रोल पंपों पर वाद-विवाद व लड़ाई झगड़े की आशंका बनी हुई है। प्रशासन द्वारा पेट्रोल पम्पो पर सुरक्षा के कोई इंतजाम फिलहाल नहीं किये गए हैं।

अपनी कमजोरी दूसरों पर फिट करने की तैयारी में पुलिस और परिवहन विभाग

हेलमेट पर सख्ती करने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग और पुलिस की है परंतु शायद आप सब जानते होंगे कि परिवहन विभाग अपनी इस जिम्मेदारी को कितना निभाता है। विभाग के अधिकारी कर्मचारी दूसरे कामों में ही बिजी रहते हैं । ऐसे में हेलमेट के लिए सिर्फ वर्ष में एक बार यातायात माह या सप्ताह मना कर फुर्सत कर ली जाती है। पुलिस के अधिकारी कर्मचारी भी अक्सर चेकिंग करते हैं परंतु हेलमेट न लगाने वालों पर कार्रवाई ना करके 100 या 50 रुपये लेकर उन्हें छोड़ दिया

आदेश का दूसरा पन्ना
जाता है अथवा किसी नेता, अधिकारी या पत्रकार का फोन आने पर उन्हें जाने दिया जाता है । अगर पुलिस और परिवहन विभाग ईमानदारी से ड्यूटी करें तो हेलमेट की अनिवार्यता लागू हो सकती है परंतु ऐसा ना कर उनके द्वारा अपनी कमजोरी पम्प वालों की तरफ भेजकर उन्हें परेशानी में डालने का काम किया जा रहा है। इससे जहां पम्प वालों का लोगों से विवाद हो रहा है वहीं पुलिस की मौजूदगी ना होने से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उनका व्यवसाय भी हेलमेट के झमेले में प्रभावित होने की बात कही जा रही है।

कानूनन जिला प्रशासन द्वारा जारी नहीं किया जा सकता “नो हेलमेट नो पेट्रोल” का आदेश

भारतीय संविधान में अधिकारों का विभाजन किया गया है। मोटर व्हीकल एक्ट में रोक, टोक और कार्रवाई का अधिकार सिर्फ परिवहन विभाग व यातायात पुलिस को दिया गया है। इसके अलावा तीसरे किसी विभाग का कोई अफसर या जनप्रतिनिधि दखल नही दे सकता। पेट्रोल पंप के कर्मचारी न तो पुलिस हैं और न परिवहन विभाग के अधिकारी कर्मचारी जो हेलमेट के लिए किसी को रोकेंगे। यूपी पेट्रोलियम ट्रेडर्स एसो के अध्यक्ष अश्वनी अत्रिश बताते हैं कि जिला प्रशासन नो हेलमेट नो पेट्रोल का लिखित आदेश जारी नही कर सकता। नोटिफिकेशन जारी करने का अधिकार राज्य या केंद्र सरकार को ही है। हालांकि उनका कहना है कि डीएम की मंशा नेक है और हेलमेट लगाने से जनता के जीवन की सुरक्षा होती है पर पेट्रोल पंप की बिक्री प्रभावित करना गलत है। चेकिंग पॉइंट बढाकर और जागरूकता के जरिये ही हेलमेट लगाने को प्रेरित किया जा सकता है।

बिना हेलमेट पेट्रोल ही क्यों बाजार से कुछ भी न मिले, किया जाय सामाजिक बहिष्कार

पूरनपुर के समाजसेवी संदीप खंडेलवाल द्वारा इस तरह जनता को किया जा रहा जागरूक
“नो हेलमेट नो पेट्रोल” से सहमत न होने वालों का एक तर्क यह भी हैं कि बिना हेलमेट पेट्रोल ही क्यों डीजल, खाद , बीज , दवाएं, सब्जी, किराना सामान आदि कुछ भी नहीं दिया जाना चाहिए। सरकारी दफ्तर में फरियाद लेकर जाने वालों से हेलमेट दिखाने को कहा जाय। सरकारी सेवको की हाजरी बिना हेलमेट न लगे जाय, स्कूल कालेजो में भी हेलमेट अनिवार्य हो, ऐसा करने से हेलमेट की अनिवार्यता और बढ़ेगी। इसके साथ ही हेलमेट न लगाने वालों का सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए। अक्सर शादी विवाह सहित अन्य समारोहों में आने वालों के हेलमेट चेक होने चाहिए। वेंकट हालों में पुलिस बिना हेलमेट वालों को प्रवेश ही ना दें। इससे वे ऐसे कार्यक्रमों में शामिल होने से भी वंचित होंगे और हेलमेट लगाने को विवश होंगे। इसके लिए पुलिस प्रशासन, स्कूल संचालकों, सामाजिक धार्मिक संगठनो को भी आगे आना होगा।

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