Tue. Oct 27th, 2020

खजूरी बनेगी अब लखनऊ प्राणी उद्यान की शोभा : बरखेडा से पकड़ी बाघिन को कल देर शाम राजधानी

खजूरी बनेगी अब लखनऊ प्राणी उद्यान की शोभा : बरखेडा से पकड़ी बाघिन को कल देर शाम राजधानीकिया गया रवाना

  1. पीलीभीत। बरखेडा के ग्राम खजुरिया पचपेडा से पकडी गई खजूरी को आज देर शाम लखनऊ के वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान के लिए भेज दिया गया। इससे पूर्व मादा बाघ का स्वास्थ्य परीक्षण एक मेडिकल टीम ने किया। परीक्षण के बाद यह तय पाया कि यह मादा बाघ जंगल में अपना शेष जीवन काल सही ढंग से नहीं काट सकती है। यदि जंगल में गई तो यह मानव-बाघ संघर्ष का कारण बन सकती है। इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट पीलीभीत टाईगर रिजर्व के उपनिदेशक आदर्श कुमार ने मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव उप्र सुनील पांडेय को भेजी। इस रिपोर्ट पर यह निर्णय लिया गया कि खजुरिया पचपेडा से पकडी गई बाघिन खजूरी को लखनऊ के प्राणी उद्यान भेज दिया जाए।
    शनिवार को ग्राम खजुरिया पचपेडा में मुकेश कुमार पुत्र छदम्मीलाल 19 और कौशल पुत्र जंग बहादुर निवासी फूटा कुआ कुरैइया को इस मादा बाघ ने घायल कर दिया था। इस मादा बाघ के हमले की सूचना पर पीलीभीत टाईगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक डाॅ.एच.राजामोहन और उप निदेशक आदर्श कुमार रेस्क्यू टीम लेकर तुरंत ही गांव पहुंच गए थे। उप्र के मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव सुनील पांडेय ने बाघ को ट्रेंकुलाइज करने की अनुमति प्रदान कर दी। इसके बाद क्षेत्र निदेशक तथा उप निदेशक आदर्श कुमार ने तीन सदस्यीय पशु चिकित्सकों की टीम बाघ को ट्रेंकुलाइज करने के लिए बना दी। इस टीम में पशु चिकित्साधिकारी डाॅ.एसके राठौर, डाॅ.राजुल सक्सेना और डब्ल्यूटीआई के डाॅ.दक्ष गंगवार को शामिल किया। शनिवार की शाम लगभग पौने छह बजे के आसपास बाघ को ट्रेंकुलाइज कर लिया गया। बाघ के ट्रेंकुलाइज होने के बाद उसे सुरक्षित भीड से निकालने में वन विभाग के अधिकारियों को मशक्कत करनी पडी। बाघ को ट्रेकुलाइज करने के बाद उसे सुरक्षित पिंजरे में डाला गया है। उसे माला रेंज के गढा वन विश्राम ले जाया गया। इस बीच मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक सुनील पांडेय के आदेश पर तत्काल बरेली के वन संरक्षक तथा बाघ विशेषज्ञ पिनाकी प्रसाद सिंह को पीलीभीत जाने को कहा गया। इसके अलावा लखनऊ प्राणी उद्यान के प्राणी उद्यान के उपनिदेशक डाॅ.उत्कर्ष शुक्ला को भी पीलीभीत पहुंचने को कहा गया। देर रात पीपी सिंह गढा पहुंच गये। सुबह पांच बजे डाॅ.उत्कर्ष शुक्ला भी पीलीभीत पहुंच गए।
    पूरी रात डाॅ.एच.राजामोहन, आदर्श कुमार,पिनाकी प्रसाद सिंह सहित पीलीभीत टाईगर रिजर्व का स्टाफ खजूरी की निगरानी करता रहा। सुबह मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के आदेश पर खजूरी का फिर से स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसके लिए तीन सदस्यीय टीम जिसमे डाॅ.उत्कर्ष शुक्ला, डाॅ.एसके राठौर तथा डाॅ.गौतम को शामिल किया गया। इस टीम ने खजूरी का स्वास्थ्य परीक्षण किया। खजूरी के दांत और नाखून पूरी तरह से घिस गये थे। इस कारण वह जंगल में रहकर शिकार करने में असमर्थ थी। इसलिए वह बाहर निकल आई। फिर मंथन किया गया। तय किया गया कि पूरी स्थिति से राज्य मुख्यालय को अवगत कराया जाए। दोपहर तक पूरी रिपोर्ट उपनिदेशक आदर्श कुमार ने तैयार कर क्षेत्र निदेशक डाॅ.एच.राजामोहन को दी। उन्होंने मुख्य वन्य संरक्षक वन्यजीव सुनील पांडेय को यह रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के आधार पर मुख्य वन सरंक्षक वन्यजीव सुनील पांडेय ने उसे लखनऊ के वाजिद अली शाह प्राणी उद्यान भेजने की सहमति प्रदान कर दी। देर शाम उसे गढा से लखनऊ के लिए भेजा गया। इस दौरान बरेली के प्रभारी मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह, पीलीभीत टाईगर रिजर्व के क्षेत्र निदेशक डाॅ.राजामोहन, उपनिदेशक आदर्श कुमार, पीलीभीत वन एवं वन्यजीव प्रभाग के प्रभागीय निदेशक संजीव कुमार, उप प्रभागीय वनाधिकारी माला श्री राय, दिलीप श्रीवास्तव, विश्व प्रकृति निधि के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार, उपनिदेशक प्राणी उद्यान डाॅ.उत्कर्ष शुक्ला शामिल थे।

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